सोमवार, अप्रैल 11, 2011

साष्टांग मार्च



पटना उच्च न्यायालय से राजभवन
दिनांक- 14.04.11, समय- 10.30 बजेे

मित्रवर
31.07.2009 से अब तक यानी 622 दिनों से मेरी बर्खास्तगी के विरुद्ध दायर अपील राजभवन सचिवालय में सुनवाई के लिए तड़प रही है। उस पर अपना विधि सम्मत निर्णय देने में महामहिम मौन हैं। मेरे द्वारा अनेक बार की गयी प्रार्थनाओं से उनका महामौन भंग न हुआ। माननीय उच्च न्यायालय के दिनांक 24.01.11 के आदेष का भी असर नहीं हुआ। यह तो बर्खास्त करने वाले अधिकारी भी अच्छी तरह जानते हैं कि पटना विष्वविद्यालय से मेरी बर्खास्तगी गैरकानूनी है। राजभवन में मेरी बर्खास्तगी की अपील का लावारिस पड़ा रहना आष्चर्यजनक है ! अतः सुनवाई की तिथि निर्धारित करने की माँग को लेकर साष्टांग मार्च का आयोजन किया जा रहा है।
संविधान निर्माता डॉ. अम्बेदकर के प्रति अपना सम्मान जाहिर करने के लिए भी उनके जन्मदिन को ‘साष्टांग मार्च’ के लिए चुना है। 14 तारीख को 10.30 बजे हमलोग हाईकोर्ट के गेट के पास स्थित अंबेदकर की प्रतिमा के निकट इकट्ठे होंगे। मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद 11.00 बजे मार्च आरंभ होगा।
साष्टांग मार्च का मतलब है अपने आठों अंगों को एक लय में संयोजित कर भूमि पर दंडवत लेटकर परम सत्य के प्रति अपने को अर्पित करना और इस क्रिया को बार-बार दुहराना। बहुत सारे लोग सुल्तानगंज से लेकर देवघर तक अपने आराध्य देवता की कृपा पाने के लिए साष्टांग मार्च करते हैं। छठ के अवसर पर या अनेक धार्मिक स्थलों पर पीड़ित लोग पीड़ा से मुक्ति के लिए इसी तरह से ईष्वर की आराधना करते हैं। कुछ लोग मनोकामना पूरी होने पर इस तरह की पूजा करते हैं। पटना में इसे लोग ‘कष्टी’ कहते हैं, क्योंकि यह कष्टसाध्य कर्म है। हमारी तरफ यानी भागलपुर जिले में इसे ‘डंड देना’ कहा जाता है। डंडे की तरह अपने षरीर को धरती पर लिटा देना, फिर उठ खड़ा होना, फिर लेट जाना- इस तरह षरीर से दूरी को नापते हुए मंदिर तक पहुँचना, वास्तव में यह कठिन आराधना है। मुझे लगा जब तक इस तरह की आराधना न की जायेगी, तब तक लोकतंत्र के मंदिर राजभवन के देवता षायद नहीं पिघलेंगे ।
इस दृढ़ आराधन के बाद भी अगर सुनवाई की तिथि निर्धारित कर न्याय की प्रक्रिया न चलायी गयी तो 24.04.11 से आमरण अनषन षुरू कर दिया जायेगा।
मैं अपने न्यायप्रिय और षांतिप्रिय मित्रों से निवेदन करता हूँ कि वे 14.04.11 को सैकड़ों की संख्या में उपस्थित होकर मुझे समर्थन दें। लेकिन मुझे छोड़कर षेष सभी लोग पैदल ही मार्च करें। कुछ गणमान्य वरिष्ठ नागरिक उस दिन हरी झंडी दिखाकर जत्थे को रवाना करेंगे। इस तरह न्याय पथ पर आगे बढ़ने के लिए हमें बल प्रदान करेंगे।

     निवेदक
मटुक नाथ चौधरी
303, सरस्वती निवास, राजेन्द्रनगर, रोड नं. -12, पटना-16
फोन- 9334149605, 9031227181
sahi converter na milne se kuch galtiyaan rah gayi hain. sorry.

4 टिप्‍पणियां:

  1. गवर्नर साहब को पैसे लेकर वी.सी., प्रो वी.सी. औए कालेजों के प्रिंसिपल बनाने से फुरसत मिले तब ना आपकी फाईल पर नजर डालेंगे. बूटा सिंह के बाद दूसरी बार ऐसा गवर्नर बिहार को नसीब हुआ है. आश्चर्यजनक ढंग से अपनी पद की गरिमा के विरुद्ध आचरण करते हैं.

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